काल कौन सा ये आया

हे अभयंकर हे महाकाल
यह बात मुझें बतला दो
कौन सा काल है ये आया
ताडंव क्या ये तेरा है
सृष्टि के संहार का
या आसुरी शाक्ति है कोई
महामारी कोरोना जिसने फैलायी
मृत्यु का है नाच नचाया
या कोई मानवता के विरोधी
दुरूपयोग विज्ञान का कर
विनाश भारी है यह फैलाया
या प्रकृति ने अपने दोहन से हो रुष्ट
अपना रोष दिखाया
अंतिम संस्कार को तरसे अपनो से
लाशों के है अम्बार लगे
अस्थियाँ भी विसर्जित होने का
इंतजार है कर रही
ऐसा समय कभी ना आया
जैसा हम आज देख रहे
सपने में भी ना सोचा था
ऐसा भी हो सकता है
भय कैसा फैला है ये
इंसान-इंसान से ही नहीं
खुद को छूने से भी है डरा
सुने पडे हैं प्रार्थना स्थल
मंद जीवन की गति पडी
थमी भागदौड़ है सबकी
कोहराम भारी है मचा
कैसा डर ये फैला है
हे अभंयकर हे महाकाल
ये बात मुझें बतला दो
कौन सा काल है ये आया
हे अभंयकर हे महाकाल।

-अनिता