मेरे चिरप्रेमी प्रियतम,
मिलन वियोग के तुम्हारे खेल से,
मुक्त मुझें तुम अब कर दो,
तुम ही तो सच्चे साथी मेरे ,
हर जन्म साथ निभाते हो,
डरते है जग में सभी तुमसे,
मृत्यु कह कर सम्बोधन है करते,
लेकिन तुम तो जीवात्मा का,
नव जीवन से पूर्व ,
विगत शरीर की स्मृतियों व पीड़ाओ से मुक्त ,
कुछ समय का शान्तिपूर्ण विश्राम हो,
चुपके से इस बार ना आना,
आने से पहले बतला देना,
बार -बार जिंदगी से मिलन,
करा मेरा तुम ,
मोह, माया के धागों से बांध,
विरह दुख देते हो,
बहुत हुईं मनमानी तुम्हारी ,
हठ अब तुम मेरा देखोगे ,
मैं बांधूगी तुमको अपने,
मोहपाश में ऐसे कसके,
मिलन,विरह का खेल तुम्हारा ,
अब ना चल पायेगा,
उस दिन तुम आना
रात चादँनी हो जिस दिन,
सावन की शीतल हवा चले,
नभ तारों से सजा रहे,
मैं स्वागत में श्रृंगार दुल्हन सा कर,
झिलमिल तारों की ओढ चुनर,
फूलों से राह तेरी सजा दूंगी,
ना व्याधि होगी तन में,
ना व्यथा रहेगी जीवन की मन में,
द्वेष,क्लेश ना होगा दिल में,
होठों पे मिलन के गीत सजाये,
नेह व ममता के बंधन,
मोह अभिलाषाओ को छोड,
बाहुपाश में तेरे आऊंगी,
संग तेरे चलने पहले,
देह से जुडे ,
नेह ओर ममता के रिश्तों को,
पल भर निहार कर,
निर्मोही बन संग तेरे चलूगी,
देख मिलन ऐसा हमारा,
चकवा भी जल जायेगा,
चिरमिलन की गाथा हमारी,
झूम-झूम,
अम्बर संग तारे भी गायेगे।

अनिता शर्मा