दर्द को अब दिल में
दफन रहने दो
जख्म बन रिस कर बहने दो
खाक को अब खाक हो जाने दो
मरहम है पास जिनके
बेपरवाह रह लेने दो
दो अश्क भी ना बहाना
सुपुर्दे – ऐ- खाक पे
जज्बातों की ही तरह,
हीरो से भी नायाब होते है ये
खर्च मुझ पर
फिजूल ना कर देना
दिल के किसी कोने में
गहराई से दफन
ऐ महबूब मेरे
बेरुखी से कर देना ।

अनिता