सुना है कि सत्य पराजित नहीं होता है,
परेशान हो सकता है,
पर धर्य को धारण करना होता है,
कोन किसका सहारा,
किसका अवलम्ब,
सहारा जब चुक जाता है,
फिर विशवास कोन जगाये,
धर्य की एक सीमा रेखा भी होती है,
जब धर्य टूटने लगता है,
उसे सबंल किसका है मिलता,
चुक जाता है विश्वास,
टूट जाते हैं सब अवलम्ब,
फिर विश्वास कोन जगाये,
कि सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं,
अटल है विश्वास,
विचलित नहीं है आस,
तब ही कृष्ण का मिलता साथ,
टूट जाते है दुनियां के सब झंझावत,
विजयी हो जाता है सत्य,
मन को फिर से होता है विश्वास
सत्य परेशान हो सकता है पर पराजित नहीं ।