कविता हूँ, मैं
मानव व प्रकृति के,
हर रगं-रूप का,चित्रण हूँ, मैं
सुख-दुख ,आँसू-हँसी,
निराशा-आशा, शौर्य-भय,
करूणा-पीड़ा, जय-पराजय,
मिलन-वियोग,सृजन-विनाश,
सुन्दर-बदसूरत, जीवन-मृत्यु ,
जीवन के हर पहलू को ,
दर्शाने वाला आईना हूँ।
मैं बुद्धि के तर्क से ज्यादा,
कोमल भावुक मन की,
गहरी अभिव्यक्ति हूँ ,
मैं संसार के यथार्थ के साथ ही,
सुन्दर काल्पनिक संसार को दर्शाती हूँ,
कविता हूँ मैं,
मानव व प्रकृति के,
हर रंग- रूप का चित्रण हूँ मैं ।

अनिता