केरल में कुछ दिन पूर्व एक गर्भवती हथिनी के साथ जो अमानवीय व्यवहार हुआ, उसने मानवता को शर्मसार कर दिया।मन बडा ही बेचैन था। मुझें ऐसा लगा मानो मानवता हमारे समाज से लुप्त हो रही है।हमारा समाज प्रकृति ओर जीव जन्तुओ के प्रति असंवेदनशील होता जा रहा है ।
परन्तु कल की एक घटना ने मुझें गलत साबित कर दिया, कि मानवता हमारे समाज से लुप्त हो रही है ।कुछ लोग इसके अपवाद हो सकते है, मगर अभी भी संवेदनशील लोग हमारे समाज में है, जो आज की भागदोड़ वाली जीवनचर्या में भी अपना समय किसी बेजुबान निरीह पक्षी की मदद करने में दे सकते हैं, उनके दर्द को बिना बोले समझ उनकी मदद कर सकते हैं ।इस सत्य घटना को मैं आप के साथ साझा करना चाहती हूँ ।
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कल सुबह नौ बजे की बात है मैं रसोई में अपने कार्य में व्यस्त थी,तभी फोन की घंटी बजी, मैंने फोन उठाया, फोन पर मेरे घर के सामने रहने वाली मेरी मित्र सीमा थी।उसने मुझसे उसके घर के बाहर रखें दूध को मेरे फ्रीज में रखने को कहा और तुरंत फोन रख दिया।हम दोनों के यहाँ एक ही व्यक्ति दूध के पैकेट देने आता है ।
सुबह ग्यारह बजे जब दरवाजे पर घंटी बजी तो मैंने दरवाजा खोला।सामने सीमा खड़ी थी मैंने उससे पूछा आज सुबह-सुबह इतना जल्दी तुम कहां चली गई थी? तो उसने मुझे बताया कि वह अपनी दवा लेने मेडिकल स्टोर गई थी। जब वह स्कूटर से मेडिकल स्टोर जा रही थी,तो उसने देखा सड़क के बीच में एक टिटहरी पंख फैलाए गिरी हुई है।उसने सोचा कि शायद किसी वाहन के नीचे आने के कारण उसे चोट लगी है।उसने स्कूटर रोक कर टिटहरी के पास जाकर देखा तो वह खड़ी हो हो गई।सीमा ने देखा कि टिटहरी के पंख के नीचे उसका एक छोटा सा बच्चा है। तभी एक और टिटहरी वहां आ गई, और जोर-जोर से चिल्लाने लगी टिटहरी का बच्चा सड़क के किनारे बारिश के पानी की निकासी के लिए बने नाले के पास जाना चाह रहा था।वह टिटहरी का जोड़ा जो शायद उस बच्चे के माता-पिता थे उसे उस नाले के पास जाने से रोक रहे थे।नाले के ऊपर सीमेंट से बनी हुई मोटी टाइल्स लगी हुई थी, उसके ऊपर छोटे-छोटे छेद थे। सीमा को लगा कि अपने बच्चे के साथ नाले को पार करके सामने घने पेड़ों की तरफ जाना चाहती है मगर कहीं वह बच्चा नाले में ना गिर जाए इसलिए वह उसे रोक रही है। सीमा ने उस बच्चे को हाथ से उठाकर नाले के दूसरी ओर आगे जाकर छोड़ दिया। टिटहरी का जोडा भी पीछे-पीछे आ गया। सीमा को लगा कि अब सब ठीक है ,और वह मेडिकल स्टोर चली गई। 15 मिनट बाद वह वापस उसी रास्ते से आ रही थी,तब उसने देखा कि नाले के पास ही टिटहरी का जोड़ा और वह बच्चा है।वो जोर-जोर से शोर कर रहे हैं, और अपने बच्चे को नाले के पास जाने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह बच्चा अपने माता पिता के पंखों के घेरे से निकल उस नाले के पास आ गया और नाले के ऊपर बने सीमेंट की टाइल के छेद से वह बच्चा नाले में गिर गया। टिटहरी का जोडा जोर-जोर से शोर करने लगा।
अंदर से बच्चे की भी आवाज आ रही थी। सीमा को कुछ समझ नहीं आया कि वह क्या करें सीमेंट की टाइल वह उठा नहीं सकती थी तभी उसने हमारी सोसाइटी के दफ्तर में फोन किया और उन्हें यह सब घटना बताई और मदद के लिए किसी को भेजने को कहा उन्होंने 10 मिनट में एक आदमी को भेजा। उसने नाले के ऊपर लगी सीमेंट की टाइल को हटाया तो देखा कि वहां टिटहरी के दो बच्चे और नाले में गिरे हुए थे।अब सीमा को समझ आया कि वह बच्चा क्यों बार-बार नाले के पास जाने की जिद कर रहा था, क्योंकि उसे उन दोनों बच्चों की आवाज आ रही थी,ओर उसके माता-पिता उसे नाले में गिरने से रोकना चाह रहे थे।अपने तीनों बच्चों को देख टिटहरी का जोड़ा जोर-जोर से शोर करने लगा, मानो वह कह रहे हो कि उनकी मदद करें और उन्हें बाहर निकाल दे। मदद के लिए आए आदमी ने नाले में जाकर तीनों बच्चों को निकालने की कोशिश की मगर वह बच्चे डर कर इधर से उधर भागने लगे और उनको निकाल पाना उस आदमी के लिए असंभव हो गया, तब उसने दो ओर आदमी को फोन करके बुलाया।वह लोग दो जाली लेकर आए और दोनों तरफ जाली लगा कर बच्चों को इधर उधर जाने से रोका।कुछ देर की कोशिश के बाद तीनों बच्चों को उन लोगों ने बाहर निकाल लिया।टिटहरी का जोड़ा बहुत खुश था और उसके बच्चे भी आवाज करते हुए बड़े खुश लग रहे थे। टिटहरी के जोड़े की आवाज में अब शोर नहीं था, मानो वह अपने बच्चों की जान बचाने के लिए धन्यवाद बोल रहे हो, टिटहरी का जोड़ा सीमा के पैरों के पास आकर खड़ा हो गया। ऐसा लगा मानो कि वह छोटा बच्चा अपने दोनों भाई बहनों के लिए ही उस नाली में गिरा था क्योंकि उसे मालूम था कि वह दोनों नीचे गिरे हुए हैं बच्चे का अपने भाई बहनों के लिए प्रेम देखकर समझ आया कि सिर्फ इंसान ही नहीं पक्षी भी एक दूसरे से प्यार करते हैं और एक दूसरे की सुरक्षा भी करना जानते और चाहते भी हैं।
सीमा से यह सब जान कर मुझे बहुत खुशी हुई। मैं उसकी संवेदनशीलता से बहुत प्रभावित हुई। सीमा से पहले भी वहां से लोग गये होंगे मगर कोई ओर जाग्रत नहीं था।इसी कारण टिटहरी का दर्द उन तक नहीं पहुंचा ।
सीमा की वजह से टिटहरी के तीनों बच्चे सुरक्षित थे।
केरल की घटना से जो मन कुछ दिनों से व्यथित था,आज उसे थोड़ा सुकून मिला, विश्वास हुआ कि मानवता अभी जिन्दा हैं ।

अनिता