कान्हा,तू जा,तू जा,मैं,तोसे देख,बोलू ना,हाँ,मैं,बोलू ना,
साँझ,सवेरे,करता है, मुझे तगं, ऐसे,साँवरे से मैं,कुछ भी बोलू ना,कान्हा,तू जा,तू जा।
1. राधा है,कृष्ण की,कृष्ण है,राधा का,रे ,
कहता है,मैं ये बोल दू ,चाहता है,मैं ये बोल दू ,
करता है, जोरी मुझसे,कभी जाता,रूठ रे,
कभी मीठी- मीठी, बातों से रिझाता है, मुझें,
अरे,ऐसे कैसे मैं, लाज का पट खोल दू ,
कान्हा,तू जा,तू जा,मैं,तोसे देख,बोलू ना,
हाँ, मैं बोलू ना ।
2. तेरी साँवली,सलोनी छवि,नैनो में ऐसी बसी,
यमुना के तीर पे, गोकुल की गलियों में,
कदंब के पेड़ तले,कुंज लताओ में,
गय्या के झुंड में, ग्वालों की टोली में,
हर जगह तेरी ही छवि, दिखती है रे,साँवरे,
कान्हा,तू जा,तू जा, मैं,तोसे देख, बोलू ना,
हाँ,मैं, बोलू ना ।
3. तेरी बांसुरी की सुन के धुन,सुध-बुध मैं भूली रे
मन का मेरे चैन गया,हियाँ का रे सुकून रे ,
तेरे प्रेम में हुई मगन,हँसती,कभी मैं गाती हूँ,
गोपियों संग पनघट जा,खाली गागर,ले मैं,आती हूँ ,
कहने लगे गोकुल के लोग, तेरी राधा हुई बावरी,
कान्हा,तू,जा,तू,जा, मैं,तोसे देख,बोलू ना,
हाँ,मैं, बोलू ना, हाँ,कान्हा तेरी राधिके,तोसे, बोले,ना,हाँ बोले ना।
-अनिता शर्मा