
व्यक्ति जब तक मर्यादा, नैतिकता, आदर्शो की डोर से बंधा रहता है,तब तक उसका जीवन पतंग की भाँति प्रगतिशील ओर ऊँचाईयों को छूता रहता है ।
व्यक्ति जब यह डोर तोड देता है, तो उसके जीवन का हश्र भी पतंग की ही भाँति होता है,जो डोर से टूटने के बाद कहाँ गिरेगी ओर किसके हाथों में होगी पता नहीं।
जय श्री कृष्णा
अनिता शर्मा✍️