कहाँ जा रहें हैं,कहाँ जायेंगे,
ज्वलंत समस्या हैं ये,
रूक कर चिन्तन गम्भीर ,
अब हमें करना होगा,
महत्वपूर्ण ईकाई समाज की,
कगार पे टूटने की,
कब के टूटे संयुक्त परिवार,
कगार पर एकल परिवार,
आधुनिकता, भोगवादी विचारधारा, पाश्चात्य संस्कृति, पैसा और पैसा कमाना सिखाने वाली मूल्यहीन शिक्षा, युवाओं को भटकाते,आदर्शहीन,मूल्यहीन,नशा,
लिव इन रिलेशनशिप की,वकालत करते चलचित्र,
कैसे परिवार,कैसा समाज,देश,
कुछ समय बाद होगा,
प्रश्न चिन्ह लगा है ये,
चिन्तन हमें अब होगा करना,
भूल कहाँ हुई है, हमसे,
कहाँ है चूके हम,बदल रहा सब,
बदलाव गर ऐसा रहा,
भविष्य होगा क्या ? भावी पीढ़ीयो का ,
क्या बदलाव ये, बदलता नारी स्वरूप है ,
घर, परिवार,रिश्तों को संवारती,
सहनशीलता की मूर्ति,
कुछ सदियों से शोषित ,अपमानित पुरूषों से हुई, पारिवारिक कार्यो को गौण मान,महत्व ना समझा,
बुद्धिहीन ,अबला मान पग-पग,अत्याचार किये ,
शिक्षित हो नारी ने,आर्थिक निर्भरता पायी आज,
पुरूषों के संग, समान काम करती नारी,
पैसा ,पदोन्नति, स्वयं का अस्तित्व महत्वपूर्ण हुआ,
पुरूष तत्व जागा उसका, नारी तत्व खोने लगा,
नारी के लिए घर,परिवार,प्रेम अब होने लगे गौण,
नानी,दादी,माँ जैसी भारतीय नारी,
अब कही खोने लगी,
दस,पंद्रह साल बाद कैसे होगे,
घर, परिवार ,समाज ,
चिन्तन हम सबको, अब करना होगा,
स्मरण फिर रखना होगा, करवाना होगा ,
विचारधारा हमारी संस्कृति ,परम्पराओ की,
सिया-राम सी, हो मर्यादा,
राधा-कृष्ण सा, प्रेम हो,
शिव-पार्वती सा साथ हो,
नर-नारी के जीवन में, इनका ही आर्दश रहे,
विवाह ओर सप्तपदी के वचनों का महत्व सदा रहे,
अस्तित्व परिवार,समाज,संस्कृति का बना रहेगा तभी,
सुरक्षित होगी भावी पीढ़ी,उत्थान तभी होगा देश का,

कहाँ जा रहे हैं, कहाँ जायेंगे,
ज्वलंत समस्या है ये,
रूक कर चिन्तन गम्भीर,
अब हमें करना होगा ।

अनिता शर्मा ✍️