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क्षीर सागर में योग निद्रा में लीन,
हैं लीलाधर रहस्य ये सुलझा दो तुम, 🙏🏻
रहस्य ये सुलझा दो तुम 🙏🏻
सृष्टि की रचना,पालन व संहार सब हाथ तुम्हारे ,
खेल अपने प्रमोद हेतु है क्या ? ये स्वयं तुम्हारा,
पंच तत्व से निर्मित माटी की ये देह,
खेल तुम्हारा खिलाड़ी हम ,
निर्णायक तुम विजेता, पराजित हम,
सृष्टि रगंमच तुम्हारा, पटकथा तुम्हारी,
कठपुतलियाँ हम सूत्रधार हो तुम ,
नचाते जैसा, वैसा नाचे नाच हम,
काम, क्रोध, मद,लोभ,मोह, ईर्षा व रोग धागें तुम्हारे,
फँसते,उलझते व सुलझाते,
सुखी-दुखी, हँसते-रोते हम,
एक पत्ता भी नही हिलता,
कहते बिन मर्जी तुम्हारे ,
पात्र तुम्हारे फिर कैसे ?
भागी बनते पुण्यों और पापों के,
सृष्टि के रगंमच में पात्र निभाते,
आगे के संवादों, भूमिका से अनभिज्ञ है रहते,
आज, कल,परसों, बरसों की रख सोच है जीते,
माया कैसी तुम्हारी भरोसा नहीं अगले ही पल होने का,
भूलावें में रहें शाश्वत रहने का,
जानबूझ के रहे सत्य से परे,
पात्र निभाते सृष्टि के रगंमच से ,
भूमिका कब हो जाएगी समाप्त ,
अनभिज्ञ रह जीते सभी,
आना-जाना गर होता अधिकार हमारे,
जन्म-मृत्यु के चक्र में हम उलझते ?
सृष्टि में हम क्या ? आते जाते ,
क्षीर सागर में योग निंद्रा में लीन,
है लीलाधर रहस्य ये सुलझा दो तुम,🙏🏻
रहस्य ये सुलझा दो तुम ।🙏🏻

🌷🌷अनिता शर्मा

योगनिद्रा का अर्थ