जहाँ लोभ और मोह के दरवाज़े बड़े ही मजबूत होते है, वहाँ खुशियाँ और आवश्यकता की पूर्ति के रास्ते बड़े ही तगं सुराखों की गली से होकर गुजरते है।                   अनिता शर्मा✍️

दर्द को अब दिल में
दफन रहने दो
जख्म बन रिस कर बहने दो
खाक को अब खाक हो जाने दो
मरहम है पास जिनके
बेपरवाह रह लेने दो
दो अश्क भी ना बहाना
सुपुर्दे – ऐ- खाक पे
जज्बातों की ही तरह,
हीरो से भी नायाब होते है ये
खर्च मुझ पर
फिजूल ना कर देना
दिल के किसी कोने में
गहराई से दफन
ऐ महबूब मेरे
बेरुखी से कर देना ।

अनिता शर्मा ✍️