समय की परीक्षा से
ऐ सखी मेरी परेशान ना हो
अच्छा था जो गया
वो भी समय था
ये जो बुरा है चल रहा
ये भी जायेगा

समय ही तो है
ना रोके से रूकता है
ना चाहने से जाता है
चक्र है उसका सदा गतिमान
स्थिर भला रहता है कहाँ
अच्छे के बाद बुरा
बुरे के बाद अच्छा
क्रम निरन्तर चल रहा
फिर से समय बदलेगा

चौरासी लाख योनियो के बाद
मानव तन मिलता है ये
कहते है सत्कर्म कर
ईश्वर का स्मरण कर
आत्मा को आवागमन के
चक्र से मुक्त करने
विश्राम पाने के लिए अवसर
ईश्वर है देते
भौतिक संतापों से
व्यथित ना मन को कर
दिव्य आत्मा को दुःख दे

दु:ख कहाँ है देख_______
जिन्हे रहने को घर नहीं
तन ढकने को कपड़े नहीं
जिन्हे पेट भरने के लिए नर्क सा जीवन जीना पडता
शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग
गम्भीर बीमारी से ग्रस्त
जीजिविषा जीवन जीने की फिर भी होती

सुख कहाँ है देख _________
आवश्यकता जीवन जीने की हो पूर्ण
निरोगी हो शरीर
अन्न की कमी ना कोई
रहने को घर हो अपना
सदाचार हो अपनो का
भले-बुरे का हो विवेक

दुख से मुक्त हो सुखी होने का उपाय———-
ईश्वर में अटूट आस्था रखना
स्थिर बुद्धि रखना
अपने से निम्न स्थिति के लोगों का जीवन देखना
सुख-दुख को ईश्वर की माया जान उनमें ना उलझना
मन को प्रसन्न रख आत्मा को प्रकाशित रखना
ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करना

समय की परीक्षा से
ऐ सखी मेरी परेशान ना हो
अच्छा था जो गया
वो भी समय था
ये जो बुरा है चल रहा
ये भी जायेगा ।

-अनिता