वाणी की शक्ति भी अपार है,
शब्दों के संयोजन का सुंदर खेल है ये ,
जो हम स्वयं को व दूसरे को बोलते है,
वाणी ही तो है जो,
जीवन को सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा देती
रोते को हँसाती,हँसते को रूलाती,
घृणा में प्रेम, प्रेम में घृणा भरती,
निराशा में आशा,आशा में निराशा भरती,
कायर को वीर, वीर को कायर बनाती,
विध्वंस में सृजन, सृजन में विध्वंस करती,
ईश्वर का अनमोल उपहार है ये,
सोच कर,समझ कर,सम्भल कर,
भावी परिणाम जान
सकारात्मक प्रयोग करे इसका ।
अनिता शर्मा ✍️