यूँ तो एक उम्र गुजारी है साथ हमने
नई सी लगें हैं प्रीत पुरानी
यूँ ही तो साथ नही हमारा
गुजरे सुख-दुःख की राहों से कई
कैसे तेरी प्रीत का सागर
दिल में समाये रहती हूँ
मैं भी ना जानू
देख तुम्हें
व्यथा मन की
व्याधि तन की 
पल में होती दूर
चाँद देख कुमोदिनी खिलती
देख तुम्हें मैं खिल जाती।

                                  अनिता शर्मा ✍