गगन को धरा का धरा को गगन का
  अब साथ चाहिए
    जाने किसकी इनको लगी है नजर
दूर रह कर जाने कब से
ये शापित सा जीवन है जिए ।

दूर ही से कब तक देखा करेगे
मिलन होगा क्या इनका भी कभी
झिलमिल तारों की ओढनी गगन की
धरा को मिलेगी भी क्या
दुल्हन की तरह सज
धरा गगन संग जायेगी क्या ।

गगन को धरा का ,धरा को गगन का
अब साथ चाहिए
जाने किसकी इनको लगी है नजर
दूर रह कर जाने कब से
ये शापित सा जीवन है जिए ।

जब -जब वेदना धरा की बढें
शुष्क हृदय विदीर्ण हो जाये है तब
देख होता गगन है तब दुःखी
नेह बरसाता अपना धरा पे
मेह की बूंदों से
धरा पा के नेह खिलती है फूलों के संग ।

गगन को धरा का धरा को गगन का
  अब साथ चाहिए
    जाने किसकी इनको लगी है नजर
दूर रह कर जाने कब से
ये शापित सा जीवन है जिए ।

धरा है सजाये सुंदर संसार
गगन है करे पालना उसकी
  चक्र जीवन का रखे सदा गतिमान
मिलन की आस में दोनों
सृष्टि को जीवन देते हुए
विलग रह जीवन हैं जिए ।

गगन को धरा का धरा को गगन का
अब साथ चाहिए
जाने किसकी इनको लगी है नजर
दूर रह कर जाने कब से
ये शापित सा जीवन है जिए ।

                     अनिता शर्मा ✍