ना आफताब
ना माहताब
ना सितारों भरा फलक
ना ख्वाबों खयालातों की
गुफ़्तगू चाहिए ।
ना कागज के पुलिंदे
ना आलीशान मकान
ना हीरे -मोती
ना सोने -चाँदी के
जेवरात चाहिए ।
तमन्ना है कुछ बड़ी
दिल का तेरे सूकून
लबों पे मुस्कुराहट
तेरा साथ हमसफ़र
ताउम्र चाहिए ।
रूखसत हो दुनिया से उस वक्त
हाथ में तेरा हाथ
सुपुर्दे-ए- खाक पे दो मुट्ठी खाक
मेहबूब मेरे
हाथों से तेरे चाहिए ।
अनिता शर्मा ✍