दीप अपना जलाए रखना ,
विश्वास अपना बनाए रखना ,
भटकें हुए को राह दिखाने का,
कर्तव्य अपना निर्वाह करते रहना,
दीप अपना जलाए रखना ।
संस्कृति, आस्था, मूल्यों, व आदर्शों को ,
मिट्टी के साँचे में सजाये रखना ,
अंधकार गहन है ,
चमचमाती तेज रंगीन रोशनियों,
आधुनिकता की चकाचौंध के अँधियारे में ,
खोये हँसेगे तुम पे,
विपरीत हवा बुझाने की कोशिश पुरजोर करेंगी ,
तुम अंगद से पैर जमाये रखना ,
कीट-पतंग की तरह कुछ ग्रास बन,
रंगीन रोशनियों में लुप्त हो जायेगें ,
चकाचौंध चुभने लगेगी जब त्रास बन,
लोट कर कुछ वापस आना चाहेंगे,
शांति व प्रसन्नता पाने ,
राह भटको को रोशनी दिखलाते रहना,
देख तुम्हें संकुचित मंदिम दीप ,
विश्वास से भर जगमगा जायेंगे,
दूर होगा गहन अंधकार ,
संस्कृति, आस्था, मूल्यों व आदर्शों के दीपों से,
रोशन होगी धरा ,
दीप अपना जलाए रखना,
विश्वास अपना बनाए रखना
भटकें हुए को राह दिखाने का
कर्तव्य अपना निर्वाह करते रहना ,
दीप अपना जलाए रखना ।
✍अनिता शर्मा