अंबा का प्रतिरूप
लौकिक रूप में माँ
अस्तिव समाये बच्चों में
धरा पर धरा सी रहती माँ
शक्ति का ज्योति पुंज घर में
मंदिर है घर आपसे ही माँ
मूरत ममता व स्नेह भरी
पालक पिता संग अन्नपूर्णा माँ
लक्ष्मी व सरस्वती स्वरूपा
शक्ति स्त्रोत्र हम सभी का माँ ।
उमंग,उत्साह से भरी
निर्मल,निस्वार्थ बहती नदी माँ
जीवन की धूप में
पेड़ की शीतल छाँव माँ
छोटे से आँचल में
ममता का सागर समाये माँ ।
माथे की बडी सी बिंदिया से
सूर्य सा उजास घर में भरती माँ
मांग की सिन्दूरी रेखा से
मर्यादा समझाती माँ
पायल की रूनझुन से
नीरसता खंडित करती माँ ।
अपना ना कोई सुख-दु:ख उनका
बच्चों के सुख-दुःख से सुखी -दुःखी होती माँ
बच्चों के दुःख का पूर्वाभास करती
आवाज़ सुन सुख-दुःख का अहसास करती माँ
व्रत व प्रार्थनाओ में बच्चों की खुशियाँ मागती
तपस्वी व दानी समान माँ ।
अंबा का प्रतिरूप
लौकिक रूप में माँ
अस्तिव समाये बच्चों में
धरा पर धरा सी रहती माँ।
-अनिता शर्मा ✍