हे उमा भगवती ,
कर तू अपनी ही, इस लीला का संधान माँ, कर तू अपनी ही, इस माया का संधान माँ,
हे उमा भगवती ,
हे उमा भगवती ।🙏🏼

काल हैं,महाकाल बन माँ,फिर रहा चहुँ ओर हैं,
हर तरफ भय हैं ये माँ , कैसा पसरा हुआ,
मुख मोड ना माँ,आँचल में ले बच्चों को अपने,
शरण तेरी आये , हम हैं माँ ,
दे अभय माँ, तुम हो अभयदायनी हे माँ ।🙏🏼

हे उमा भगवती,
कर तू अपनी ही ,लीला का संधान माँ,
कर तू अपनी ही ,माया का संधान माँ,
हे उमा भगवती,
हे उमा भगवती ।🙏🏼

भूल हैं ये सब हमारी माँ ,मानते हैं हम ,
ना नियम ना ही संयम माँ,हमने हैं अपनाये,
नैतिकता ओर मूल्यों  को त्याग,
मानव से दानव बन गये माँ,
कर क्षमा माँ, तुम हो क्षमाशील हे माँ ।🙏🏼

हे उमा भगवती,
कर तू अपनी ही,इस लीला का संधान माँ,
कर तू अपनी ही,इस माया का संधान माँ ,
हे उमा भगवती,
हे उमा भगवती ।🙏🏼

जल,थल,नभ, ये पवन, प्राणी, माँ
सब हैं तेरी सुंदर कृतियाँ,
अज्ञानी बन हमने ने ही माँ,दोहन हैं इनका किया,
रूप छिन्न-भिन्न देख इनका,रुष्ट माँ तुम हो रही,
कर दया माँ, तुम हो दयामयी हे माँ ।🙏🏼

हे उमा भगवती,
कर तू अपनी ही,इस लीला का संधान माँ,
कर तू अपनी ही इस माया का संधान माँ,
हे उमा भगवती,
हे उमा भगवती ।🙏🏼
                          अनिता शर्मा ✍