हे शिव शंकर
आलौकिक मंदिर ये तेरा
पल में भूलूँ
इस जग को
पा दर्श तेरा ।

मंदिर हैं ऐसा
आँखे मन भर
दर्श तेरा कर पायें
ह्रदय आनन्द से भरे अपार
श्रवण कर आरती
रोम-रोम हो पुलकित
शहनाई की सुंदर धुन
अहसास कराती
तुझसे दूर होने का
कुछ पल
आत्मसाक्षात्कार पा
शरीर से विलग होने का अहसास
शरीर की नश्वरता
आत्मा की अनंत यात्रा
मैं कौन, क्यों ,कब से कब तक
प्रश्नों के उत्तर
क्या हैं छुपा रहस्य यहाँ
जाग्रत हो सुप्त चेतना यहाँ
बहते अश्रु अविरल
रोकती भरभस
पा संसार का भान
कोई समझे ना मिथ्या
जग में तेरे मैं दुःखी
कृपा अगिनत
हे शिव शंकर
तेरी हैं मुझपर
अहसास होना
पिता रूप में
हर पल साथ
माँ शक्ति संग
तुम मेरे रहते
सम्पदा ये मेरी
है जग में सबसे बड़ी

हे शिवशंकर
आलौकिक मंदिर ये तेरा
पल में भूलूँ
इस जग को
पा दर्श तेरा ।
                 अनिता शर्मा ✍