दिल कांच सा होता नाजुक ,
सुनते आयें ,
दरक कर दर्द से ,
टूट हैं जाता ,
किरचें चुभने सा दर्द,
बार-बार होता महसूस ,
टुकड़े  बिखरे बाहर ,
पर कहीं दिखते नहीं ……
                           अनिता शर्मा ✍