आईने ने पूछा आज कई दिनों बाद,
कैसी हो,
मुस्कुरा कर अक्स बोला,
मैं– मैं ठीक हूँ ,
पलकों में छिपी बूंदों को देख,
आईने कहा,
तन का दर्द तो ज़िम्मेदारी निभाने में, कब से छिपा लिया करती हो–
तारीफ करनी पड़ेगी,
आज दिल का दर्द छिपाने की, कारीगरी भी बखूबी सीख गई हो—
                              अनिता शर्मा✍