मसलों की तकरार को ,
वक्त के फैसले पर सुपुर्द कर,
शिकायतों के पुलिंदे को
दिल- ए- जज्बात से रूखसत करते हैं,
इल्तिजा हैं, जीत मेहबूब हो तेरी
हम तो दिल हार,
वैसे ही सब हार बैठे हैं —
अनिता शर्मा ✍
मसलों की तकरार को ,
वक्त के फैसले पर सुपुर्द कर,
शिकायतों के पुलिंदे को
दिल- ए- जज्बात से रूखसत करते हैं,
इल्तिजा हैं, जीत मेहबूब हो तेरी
हम तो दिल हार,
वैसे ही सब हार बैठे हैं —
अनिता शर्मा ✍