प्रकृति ओर जिंदगी
दयालु हो देती अगिनत उपहार हमें
अवहेलना करने पर चेताती
बार-बार दे संकेत
ना समझी पर
धर क्रूर रूप
छीन सब उपहार
अपने ही तरीके से
भयावह रूप से समझाती।
            अनिता शर्मा 🖊