भावनात्मक रूप से हर इंसान का मानसिक स्तर भिन्न-भिन्न होता है, एक अनजाने में स्वयं से चीटी के मर जाने से ग्लानि से ग्रसित हो जाता है, ओर एक जानबूझकर किसी मनुष्य की हत्या कर भी दुखीं नहीं होता , हम फिर कैसे सभी मनुष्यों के भावनात्मक स्तर को एक तराजू पर तौल सकते है —–

अनिता शर्मा 🖊