मोती बिखरे हैं ये मेरे
सूरत तेरी इनमें कैसे समाई ……
चली हवा ये कैसी
दूर मुझें तुझसे कर गई ………..
छाई धूप गम की ये कैसी
आँखों के आँसू सुखा गई …….
पत्थर बना कैसे ये दिल
मोम सा प्यार जम गया …….
टूटा दिल ऐसा गाँठे लगी इतनी
अब कोई गाँठ लगती नहीं …….
दरक गया कैसे ये मन
अब तुझसे जुड़ता ही नहीं …….
कैसा शांत हैं यह सागर
हलचल तूफान सी जिसमे समाई……
शुरू हुआ कैसा ये तन्हा सफर
मंजिल का पता नहीं ………..
अनिता शर्मा ✍