जो सुख परम गति से विचलित करे
वो सुख न ही हो
संकल्प एक मुक्ति का ही हो
बाकि कोइ बीज शेष ना हो
सोचा हुआ
सब प्रभु का
घटित होता
जीवन में सशंय ना हो
जीवन के विक्षेप हटे सभी
हर क्षण, हर दिन, हर महीना,
हर वर्ष शुभ हो….

मेरी आत्मीय बहन
तनु✍️