लोभ, मोह,पाखंड, ईर्ष्या व द्वेष रूपी विकारों से युक्त लोगो
से एकतरफा रिश्ता निभाना ऐसा है जैसे किसी मृत शरीर को मोह वश होकर अपने कंधों पर ढोना ,
एक समय पर शरीर से निकलती दुर्गंध और उसका भार आपको उससे मुक्त होने के लिए विवश कर ही देता है,
इसी तरह एक समय के बाद आपकी अन्तरात्मा भी आपको ऐसे रिश्तों के भार से मुक्त होने के लिए  विवश कर देती है ।

                             अनिता शर्मा✍️