ज़िंदगी की किताब के पन्ने
कुछ अनछुए
कुछ अधखुले
कुछ कड़वे
कुछ मीठे
कुछ बिन समझे पल्टें
कुछ समझ कर पल्टें
कुछ अनकहे
कुछ कहे
कुछ अनचाहे
कुछ चाहे
कुछ अनजाने
कुछ पहचाने
कुछ उलझे
कुछ सुलझे
वक्त की कलम से लिखे
वक्त की स्यायी से रंगे
वक्त के हाथों से मिटे ……
अनिता शर्मा✍️