ज़मीन-आसमान में
मैं अपना हिस्सा तलाशती हूँ
मैं तेरे जहान में ए मालिक
मुक़म्मल होने का
वो हुनर तलाशती हूँ ।
ज़मीन-आसमान में
मैं अपना हिस्सा तलाशती हूँ
मैं तेरे जहान में ए मालिक
मुक़म्मल होने का
वो हुनर तलाशती हूँ ।
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