ख़फ़ा सा वो जमाने से रहता है
जिंदगी है जो मेरी
ख़ता करने की नादानियाँ
ये दिल
उम्र के उस मुकाम पे छोड़ आया
डूबा था दिल जब मोहब्बत में उसकी
ओरो की ख़ताओ से भी
वो ख़फ़ा
हमसे हो है जाता ।
ख़फ़ा सा वो जमाने से रहता है
जिंदगी है जो मेरी
ख़ता करने की नादानियाँ
ये दिल
उम्र के उस मुकाम पे छोड़ आया
डूबा था दिल जब मोहब्बत में उसकी
ओरो की ख़ताओ से भी
वो ख़फ़ा
हमसे हो है जाता ।
Have a WordPress.com account? Log in now.