क्या कोई सच में ,ऐसा-ऐसा,भी कर सकता है,क्या ,
क्या कोई सच में ,ऐसा – ऐसा भी कर सकता है, क्या कोई ,उम्मीदों को, नये से नये से ,
पंख दे सकता है, क्या,
क्या कोई सच में—————
1 क्या कोई,
खट्टी-कड़वी ,फीकी -फीकी, सी बातों में ,
रसगुल्ले सा,रस ,भर सकता है,क्या
क्या कोई सच में —————-
2 क्या कोई ,
टूटे – बिखरे, बेरंग से ,
सपनों में सतरंगी से,
रंग भर सकता है, क्या,
क्या कोई सच में————-
3 क्या कोई
काली गहरी, अंधियारी रातों में,
दीपक बन ,उजियारा ,
दिखला सकता है,क्या,
क्या कोई सच में———
क्या कोई सच में,ऐसा-ऐसा भी, कर सकता है,क्या,
क्या कोई ,उम्मीदों को ,नये से नये से ,
पंख दे सकता है क्या ,
हाँ ,हाँ वो, तुम ही,तो,हो,तुम ही,तो हो,
जो सच में ऐसा-ऐसा भी ,कर सकते हो ।
✍अनिता शर्मा