तुम चैन की बंसी बजा रहे
योग निंद्रा में लीन
मंद-मंद मुस्कुरा रहे देख
अपनी माया से रचे संसार में
माया के बंधनों में उलझते-सुलझते
हँसते-रोते,भ्रमित व व्यथित
अपने माटी के खिलौनों को
यथार्थ नहीं कुछ यहाँ
विकारों, कामनाओं
आशा -निराशा
सुख-दुःख
मिलना – बिछड़ना
खोना – पाना
तृष्णा, अपेक्षाओं
मोहजाल से रचा संसार
सोयी चेतना बुनती
अपना फिर भी स्वप्न संसार ।

                               अनिता शर्मा ✍