प्रीत

यूँ तो एक उम्र गुजारी है साथ हमने
नई सी लगें हैं प्रीत पुरानी
यूँ ही तो साथ नही हमारा
गुजरे सुख-दुःख की राहों से कई
कैसे तेरी प्रीत का सागर
दिल में समाये रहती हूँ
मैं भी ना जानू
देख तुम्हें
व्यथा मन की
व्याधि तन की 
पल में होती दूर
चाँद देख कुमोदिनी खिलती
देख तुम्हें मैं खिल जाती।

                                  अनिता शर्मा ✍

                                 

जीवन यात्रा

अतृप्त कामनाएँ
अतृप्त मोह
बंधती आत्मा
बांधता मन
नया शरीर
नये चेहरे
अनवरत यात्रा
आवागमन चक्र निरन्तर ।

यह सत्य है

सुना है, पढ़ा है, जाना है, देखा है ,
यह सत्य है ।

अच्छे व सच्चे लोग इस दुनिया में
सामना है करते अधिक दुःख व परेशानियों का
मनुष्य है हम तो धरा पर
मनुष्य रूप में स्वंम ईश्वर भी
सहते दुःख व परेशानियाँ अनेक।

सुना है, पढ़ा है  जाना है, देखा है,
यह सत्य है ।

ईश्वर सदा अपने प्रिय बच्चों को
संधर्ष व प्रतिकूल परिस्थितियों में डाल ले परीक्षा
उनके व्यक्तित्व को उसी भाँति निखारते हैं
जैसे सोना आग में जितना तपता है
उतना ही निखरता जाता है ।

सुना है, पढ़ा है, जाना है, देखा है,
यह सत्य है ।

कभी-कभी आपके ही बेहद प्रिय व्यक्ति को
दुःख व परेशानी देने का कारण बना
जटिल परीक्षा भी है लेते
माया समझे जो मायापति की विचलित ना हो पल भर
स्थिर बुद्धि रख वो भी है खेलें खेल मायापति संग  ।

सुना है, पढ़ा है, जाना है ,देखा है,
यह सत्य है ।

जीवन में सुख व प्रसन्नता आने से पूर्व
दुःख व परेशानियाँ ओर अधिक बढ जाते है
सुबह उजाला होने से कुछ समय पूर्व
रात्रि का अंधकार ओर गहन हो है जाता
जीवन में फिर सुख व प्रसन्नता का सूर्य है आता ।

सुना है, पढ़ा है, जाना है, देखा है,
यह सत्य है,
हाँ

यह सत्य है ।

-अनिता शर्मा

वाणी

वाणी की शक्ति भी अपार है,
शब्दों के संयोजन का सुंदर खेल है ये ,
जो हम स्वयं को व दूसरे को बोलते है,
वाणी ही तो है जो,
जीवन को सकारात्मक व नकारात्मक ऊर्जा देती
रोते को हँसाती,हँसते को रूलाती,
घृणा में प्रेम, प्रेम में घृणा भरती,
निराशा में आशा,आशा में निराशा भरती,
कायर को वीर, वीर को कायर बनाती,
विध्वंस में सृजन, सृजन में विध्वंस करती,
ईश्वर का अनमोल उपहार है ये,
सोच कर,समझ कर,सम्भल कर,
भावी परिणाम जान
  सकारात्मक प्रयोग करे इसका ।

                                 अनिता शर्मा ✍️

ख़फ़ा

ख़फ़ा सा वो जमाने से रहता है
जिंदगी है जो मेरी
ख़ता करने की नादानियाँ
ये दिल
उम्र के उस मुकाम पे छोड़ आया
डूबा था दिल जब मोहब्बत में उसकी
ओरो की ख़ताओ से भी
वो ख़फ़ा
हमसे हो है जाता ।

तलाश

ज़मीन-आसमान में
मैं अपना हिस्सा तलाशती हूँ
मैं तेरे जहान में ए मालिक
मुक़म्मल होने का
वो हुनर तलाशती हूँ ।

चाहत

चाहते तो है बहुत लोग हमें
चाहत पर ये दिल तेरी चाहता है
तारीफ तो होती है बहुत
तारीफ ये दिल तेरी चाहता है
चाहत को तुम्हारी
कमजोरी अपनी बना बैठे
काश चाहा होता ऐसे
चाहत हमारी
चाहत बन तुम्हारी जाती ।

विवाह की 50वी सालगिरह

उम्र अपने निशान छोड़ जाती हैं
लोगों व चेहरो को जाती बदलती
सफर जीवन का
कड़वे, खट्टे, मीठे पलों को जीते हुए
संधर्ष ,भागदौड़ व आरामदायक पगडंडियो से गुजर
मंजिल पे हैं आज
बैठो,देखों आज
सच ही तो कहते हैं लोग
जीवन स्वप्न सा हैं
स्वप्न सा बीता कल
झूठा सा लगता है
संधर्ष पर विजय अकल्पनीय लगती है
वर्तमान ही सच्चा सा लगता है
मीठे है पल आज
समय निशान अपने छोड
पंख पे बिठा लाया यहाँ
फूलों से सुवासित बगिया जीवन की
सफर की सुंदर हैं मंजिल
खुशियों से भरे दृश्य है आज
पल मैं बदलता जीवन हैं
जी भर जी ले इन पलों को
नैनो में बसा ले दृश्य स्वर्णिम ये

🥳😊खुशियों से भरे यह पल
माँ-पापा के जीवन में सदा रहे
माँ जगतजननी व जगतपिता
आपको निरोग व प्रसन्न रखें
प्रेम व साथ आपका
शिव -पार्वती सा बना रहें
हम बच्चों पर आपकी छाँव
स्नेह व आशीर्वाद सदा रहे ।🙏🏼

🌷आज के मंगलमय दिन पर हम सभी बच्चों की ओर से बहुत-बहुत शुभकामनाएँ 🌷
🙏🏼😊

समय की परीक्षा

समय की परीक्षा से
ऐ सखी मेरी परेशान ना हो
अच्छा था जो गया
वो भी समय था
ये जो बुरा है चल रहा
ये भी जायेगा

समय ही तो है
ना रोके से रूकता है
ना चाहने से जाता है
चक्र है उसका सदा गतिमान
स्थिर भला रहता है कहाँ
अच्छे के बाद बुरा
बुरे के बाद अच्छा
क्रम निरन्तर चल रहा
फिर से समय बदलेगा

चौरासी लाख योनियो के बाद
मानव तन मिलता है ये
कहते है सत्कर्म कर
ईश्वर का स्मरण कर
आत्मा को आवागमन के
चक्र से मुक्त करने
विश्राम पाने के लिए अवसर
ईश्वर है देते
भौतिक संतापों से
व्यथित ना मन को कर
दिव्य आत्मा को दुःख दे

दु:ख कहाँ है देख_______
जिन्हे रहने को घर नहीं
तन ढकने को कपड़े नहीं
जिन्हे पेट भरने के लिए नर्क सा जीवन जीना पडता
शारीरिक और मानसिक रूप से विकलांग
गम्भीर बीमारी से ग्रस्त
जीजिविषा जीवन जीने की फिर भी होती

सुख कहाँ है देख _________
आवश्यकता जीवन जीने की हो पूर्ण
निरोगी हो शरीर
अन्न की कमी ना कोई
रहने को घर हो अपना
सदाचार हो अपनो का
भले-बुरे का हो विवेक

दुख से मुक्त हो सुखी होने का उपाय———-
ईश्वर में अटूट आस्था रखना
स्थिर बुद्धि रखना
अपने से निम्न स्थिति के लोगों का जीवन देखना
सुख-दुख को ईश्वर की माया जान उनमें ना उलझना
मन को प्रसन्न रख आत्मा को प्रकाशित रखना
ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करना

समय की परीक्षा से
ऐ सखी मेरी परेशान ना हो
अच्छा था जो गया
वो भी समय था
ये जो बुरा है चल रहा
ये भी जायेगा ।

-अनिता

दर्द

दर्द को अब दिल में
दफन रहने दो
जख्म बन रिस कर बहने दो
खाक को अब खाक हो जाने दो
मरहम है पास जिनके
बेपरवाह रह लेने दो
दो अश्क भी ना बहाना
सुपुर्दे – ऐ- खाक पे
जज्बातों की ही तरह,
हीरो से भी नायाब होते है ये
खर्च मुझ पर
फिजूल ना कर देना
दिल के किसी कोने में
गहराई से दफन
ऐ महबूब मेरे
बेरुखी से कर देना ।

अनिता शर्मा ✍️